कुरुक्षेत्र विस्तार से

कुरुक्षेत्र की स्थापना – 23 जनवरी 1973

क्षेत्रफल – 1530 वर्ग कि. मी

उपमण्डल – थानेसर , पेहोवा , शाहबाद

तहसील – थानेसर , पेहोवा , शाहबाद

👉👉👉👉 कुरुक्षेत्र के नामकरण

कहा जाता है कि यहाँ स्थित विशाल तालाब का निर्माण महाकाव्य महाभारत में वर्णित कौरवों और पांडवों के पूर्वज राजा कुरु ने करवाया था। कुरुक्षेत्र नाम ‘कुरु के क्षेत्र’ का प्रतीक है।

👉 👉 👉 कुरुक्षेत्र का इतिहास

यह क्षेत्र सरस्वती व द्वाशदति नदीयों के मध्य स्थित था । इन भूमि को विभिन्न अवधियों में उतर्वेदी , ब्रहावेदी , धर्मक्षेत्र , व कुरुक्षेत्र आदि नामो से जाना गया

मुख्यालय – कुरुक्षेत्र

प्रमुख फसल – गेहूं , चावल

अन्य फसल -गन्ना , आलू , तिलहन,

👉 👉 👉 कुरुक्षेत्र के प्रमुख उद्योग

👉 हथकरघा उद्योग

👉 खाद्य उत्पाद

👉 शाहबाद चीनी मील

👉 कृषि उपकरण

जनसंख्या – 964231

जनसंख्या वृद्धि – 16.8 प्रतिशत

लिंगानुपात – 889 महिलाएं (1000 पुरूषों पर)

साक्षरता दर – 76.7 प्रतिशत

साक्षरता महिला – 69.2 प्रतिशत

👉👉 कुरुक्षेत्र के उपनाम

👉 धर्म नगरी

👉 सिटी ऑफ पार्क्स

👉 वैदिक सभ्यता का पालना

👉 लघु महासागर

👉👉👉 प्रसिद्ध गुरुद्वारे

👉 छठी पातशाही गुरुद्वारा

👉 नौंवी पातशाही गुरुद्वारा

👉 राजघाट गुरुद्वारा

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👉👉👉 कुरुक्षेत्र अंबाला मंडल में है

👉 कुरुक्षेत्र की सीमा पटियाला जिले के साथ लगती है

👉 1009 ईस्वी व 1014 ईस्वी में महमूद गजनवी ने थानेसर पर हमला किया थे

👉 धर्मक्षेत्र अखबार रोहतक से प्रकाशित होता था

👉 हरियाणा का प्रथम विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में है

👉👉कुरुक्षेत्र जिले के दो जवानों को महावीर चक्र प्राप्त है –

👉👉 मेजर आर एस दयाल

👉👉 ले कर्नल हरवंश सिंह

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👉👉👉 कुरुक्षेत्र के पर्यटन स्थल

👉👉 ब्रह्मसरोवर

👉 इस तीर्थ के विषय में महाभारत तथा वामन पुराण में भी उल्लेख मिलता है। जिसमें इस तीर्थ को परमपिता ब्रह्म जी से जोड़ा गया है। सूर्यग्रहण के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर लाखों लोग ब्रह्मसरोवर में स्नान करते हैं।

परंपरा के अनुसार, यहां भगवान ब्रह्मा द्वारा शिव लिंग स्थापित किया गया था। नवंबर-दिसंबर में ब्रैमरोवर के तट पर वार्षिक गीता जयंती समारोह आयोजित किया जाता है।

👉👉 शक्ति पीठ , भद्रकाली मन्दिर

👉 कुरुक्षेत्र में शक्तिपीठ श्री देविकूप भद्रकाली मंदिर में माता सती के दाहिने घुटने गिर गए। पौराणिक कथाओं में यह है कि महाभारत की लड़ाई के लिए आगे बढ़ने से पहले, भगवान कृष्ण के साथ पांडवों ने यहां उनकी पूजा के लिए प्रार्थना की और अपने रथों के घोड़ों को दान दिया, जिसने इसे चांदी, मिट्टी से बने घोड़ों की पेशकश करने की पुरानी परंपरा बना दी

👉👉 श्री कृष्ण संग्रहालय

👉 यह संग्रहालय, भगवान श्री कृष्‍ण को समर्पित है जिसे कुरूक्षेत्र विकास प्राधिकरण के द्वारा 1987 में बनवाया गया था। इसे बाद में मौजूदा इमारत में स्‍थानांतरित कर दिया गया था। इसका भारत के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति श्री आर. वैंकटारमन के द्वारा उद्घाटन किया गया था।

👉👉ज्योतिसरोवर

👉 ज्योतिसर वह जगह है जहां गीता का जन्म स्थान पवित्र ज्योतिसर कुरुक्षेत्र का सबसे सम्मानित तीर्थ है। ऐसा माना जाता है कि महाभारत युद्ध ज्योतिसर से शुरू हुआ, जहां युद्ध की पूर्व संध्या पर अर्जुन को गीता के शासक भगवान कृष्ण से अनन्त संदेश मिला। ऐसा कहा जाता है कि आदि शंकरचार्य ने ईसाई युग की 9वीं शताब्दी में हिमालय के रहने के दौरान इस स्थान की पहचान की है। 1850 में कश्मीर के एडी किंग ने तीर्थ में एक शिव मंदिर का निर्माण किया।

👉👉सन्निहित सरोवर कुरुक्षेत्र

👉 सन्निहित सरोवर कुरुक्षेत्र भगवान विष्णु का स्थायी निवास माना जाता है,
ऐसा माना जाता है कि तीर्थों की पूरी श्रृंखला यहां अमावस्या के दिन इकट्ठा होती है, यदि कोई व्यक्ति सौर ग्रहण के समय श्राद्ध करता है और इस टैंक में स्नान करता है, तो वह 1000 अश्वमेघ यज्ञ के फल प्राप्त करता है। सूर्य ग्रहण के समय, तीर्थयात्री इस पवित्र स्थान पर इकट्ठे होते हैं।
सिख गुरु भी समय-समय पर इस पवित्र स्थान पर गए हैं।

👉👉 पैनोरमा एंड साइंस सेंटर

👉 कुरुक्षेत्र पैनोरमा एंड साइंस सेंटर एक सुंदर बेलनाकार इमारत है जिसका प्रयोग आगंतुकों की गतिविधियों के लिए प्रदर्शनियों और कामकाजी मॉडल के लिए किया जाता है। कुरुक्षेत्र पैनोरमा और विज्ञान केंद्र में जमीन के तल में और बेलनाकार दीवारों के साथ पहली मंजिल में दो अलग-अलग प्रकार के प्रदर्शन होते हैं।

👉👉 कल्पना चावला तारामंडल

👉 हरियाणा स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी, सरकार द्वारा कुरुक्षेत्र-पेहोवा रोड (ज्योतिसार तीर्थ के पास) में कल्पना चावला मेमोरियल प्लेनेटरीयम स्थापित किया गया है।

24.07.2007 को हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री ने तारामंडल राष्ट्र को समर्पित किया था।

👉👉श्री वेंकटेश्वर स्वामी तिरुपति बालाजी मंदिर

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कुरुक्षेत्र के थानेसर में ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर में स्थापित भव्य मंदिर का उद्घाटन किया। मंदिर में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की गईं, जिसके बाद भक्तों के लिए इसे घोषित कर दिया गया। मंदिर के द्वार 6 बजे से शाम 9 बजे तक खुले रहेंगे
अब हरियाणा या उत्तर भारत के भगवान तिरुपति बालाजी के भक्त आंध्र प्रदेश में तिरुपति जाने के बजाए भगवान बालाजी से आशीर्वाद मांगने के लिए कुरुक्षेत्र जा सकते हैं

👉👉👉 .नरकातारी भीष्म कुंड ( बाण गंगा)
👉 कुरूक्षेत्र दर्शनीय स्थल में यह स्थान कुरूक्षेत्र से 6 किलोमीटर की दूरी पर पेहवा रोड पर स्थित “नरकातारी गांव” के समीप नरकातारी भीष्म कुंड है। इसे बाण गंगा के नाम से भी जाना जाता है। इसी स्थान पर भीष्म पितामह अर्जुन के तीरो से घायल होकर बाण शैया पर लेटे थे। उन्होने अर्जुन से पीने के लिए जल मागा था। तब अर्जुन ने पृथ्वी में बाण मारकर जल की उत्पत्ति की थी। जिसे पीकर पितामह तृप्त हुए थे।

👉👉 शेख चिल्ली का मकबरा

👉 यह मकबरा कुरूक्षेत्र से ढाई किलोमीटर की दूरी पर थानेश्वर के निकट है। तजकारते औलिया के अनुसार हजरत शेखचिल्ली जो कि सूफी सम्प्रदाय के ईरानी संत थे। इस मकबरे का निर्माण कुतुब जलालुद्दीन ने करवाया था।

👉👉 पेहवा

👉 यह एक पितृ तीर्थ है। यहा पिण्डदान का महत्व हरिद्वार, काशी तथा गया जैसे तीर्थो के समान माना जाता है। यहा बहुत से प्राचीन मंदिर है। जिनमे से अधिकांश का निर्माण राजा भोजदेव ने सन् 1882 के आस पास करवाया था।

👉👉 थानेसर स्थल

थानेसर एक पुराना शहर है जो कुरूक्षेत्र जिले में सरस्‍वती घग्‍गर नदी के तट पर स्थित है। यह शहर दिल्‍ली से 160 किमी. की दूरी पर स्थित है। इस शहर पर हर्षवर्धन के पिता प्रभाकरवर्धन के द्वारा शासन किया गया था। वह वर्धन वंश के पहले शासक थे और उनकी राजधानी स्‍थानेश्‍वरा थी, जो वर्तमान में थानेसर में स्थित है। थानेसर एक गांव के रूप में 1950 तक जाना जाता था
कुरुक्षेत्र जिले के भीम अवार्ड से सम्मानित खिलाड़ी है , रानी रामपाल , पुनीत राणा

👉 👉प्राचीन स्थानेश्वर महादेव मंदिर –

👉 कुरुक्षेत्र के इस प्राचीनतम मंदिर, स्थानेश्वर महादेव मंदिर, पर ही इस नगर को थानेसर कहा जाता है। थानेसर या स्थानेश्वर को यहाँ का ग्रामदेवता भी माना जाता है।

अभिलेखों की मानें तो इसे स्थानु भी कहा जाता था। उनके अनुसार ब्रम्हाजी ने स्वयं यहाँ शिवलिंग की स्थापना की थी।

हर्ष का टीला

हर्ष का टीला – कुरुक्षेत्र
हर्ष का टीला कुरुक्षेत्र का प्राचीनतम जीवित खँडहर है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा स्थापित सूचना पट्टिका के अनुसार यह स्थान 7 वीं सदी के आरंभ में पुष्यभूति कुल के राजा हर्षवर्धन की राजधानी थी। जैसा कि आप जानते हैं, कवी बाणभट्ट के अपनी रचना हर्षचरित में राजा हर्षवर्धन तथा उनकी राजधानी का बखान किया है। उनकी रचना के अनुसार यहाँ एक दुर्ग तथा श्वेत दुमंजिला महल था जिसका वर्तमान में कोई अस्तित्व शेष नहीं है। केवल हर्ष का टीला अब भी विद्यमान है।

👉👉 कुरुक्षेत्र के मेले

👉 सूर्यग्रहण स्नान उत्सव

👉 पेहोवा का मेला

👉 देवी का मेला

👉 मारकण्डा का मेला

👉 बैशाखी का मेला

👉👉👉कुरुक्षेत्र के कुछ अन्य बिंदु

👉 गीता भवन

👉 श्री शनि धाम

👉 कालेश्वर तीर्थ

👉 बिरला मन्दिर

👉 श्री कृष्ण संग्रहालय

👉 शेख चिली का मकबरा

👉 बाबा काली कमली का डेरा

👉 प्राची तीर्थ

👉 देविकुप मन्दिर

👉 कमलनाथ तीर्थ

👉 गौड़ीय मठ

👉 नरकतारी ( अनरक ) तीर्थ

👉 लक्ष्मी नारायण मंदिर

👉 कुकुट रोग जांच प्रयोगशाला

👉 आकाशवाणी केंद्र ( 24 जून 1991 )

👉 पिपली चिड़ियाघर

👉 नीले पिले रंग की मस्जिद

👉 वाल्मीकि आश्रम

👉 नीलक्रांति कृष्णा डेम

👉 नीलकंठ धाम

👉 कुबेर तीर्थ

👉 ब्लेक बक प्रजनन केंद्र

👉 व्यास ऋषि आश्रम

👉 आपगा तीर्थ

👉 धर्म समाचार पत्र ( 1943 )

👉 प्रसिद्ध भगवानपुर स्थल

काला तीतर प्रजनन केंद्र , पिपली मगरमच्छ प्रजनन केंद्र भौर सैदां कुरुक्षेत्र में स्थित हैं

महिला हॉकी एकेडमी कुरुक्षेत्र में स्थित है

राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान (NIT) कुरुक्षेत्र में है
👉👉 हरियाणा में सर्वाधिक आलू शकरकंद कुरुक्षेत्र जिले में होते हैं

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