करनाल विस्तार से ……

स्थापना – 1 नवंबर 1966

जनसंख्या घनत्व – 597 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर

उपमंडल –करनाल, असंध, इंद्री

तहसील –करनाल, असंध, नीलोखेड़ी, इंद्री, घरौंडा

उप-तहसील –निसिंग, बल्ला व निगंधु

खंड –घरौंडा, इंद्री, करनाल, नीलाखेड़ी, चिड़ियाओं व असंध

लिंगानुपात – 886/1000

साक्षरता दर – 44%

करनाल का प्राचीन इतिहास

प्राचीन समय में अंबाला और करना अलग जिले नहीं थे तो उस समय 1841 ईस्वी में अंग्रेजों ने यहां पर अपने सैनिक छावनी भी बनाई थी, लेकिन यहां पर मलेरिया फैलने के कारण वह इस शहर को छोड़कर चले गए थे I करनाल शहर को राजा कर्ण के द्वारा बसाया गया था जिसका प्राचीन नाम “करणलय” हुआ करता था। 1739 में नादिरशाह की मोहम्मद शाह के खिलाफ जीत के बाद यह शहर सुर्खियों में आया I जींद के राजा ने 1763 मैं इस शहर को अपने कब्जे में किया और 1797 ईस्वी को जारज थामस ने इस पर अपना अधिकार जमा लिया

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👉👉करनाल के प्रमुख मेले

👉छड़ियों का मेला – करनाल

👉पराशर का मेला – तरावड़ी

👉बाबा सिमरन दास का मेला – इंद्री

👉पांडू मेला – पापहाना

👉सारस मेला – करनाल

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👉👉👉करनाल के महत्वपूर्ण संस्थान

👉👉केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान

👉कृषि से जुड़ा यह योग्य जमीन से लवणता दूर करने की दिशा में “केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान” की स्थापना 1969 में की गई। इस संस्थान का मुख्यालय करनाल के जरिफा वीरा गांव में काछवा रोड पर स्थित है I इस अनुसंधान संस्थान की स्थापना के लिए एक “इंडो-अमेरिकन जल प्रबंधन विशेषज्ञ समिति” के द्वारा सिफारिश की गई थी I

👉👉गेहूं शोध निदेशालय

👉सन 1965 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अर्थात आई.सी.ए.आर. ने “सर्वभारतीय संबंधित समन्यवक गेहूं सुधार परियोजना” की शुरूआत की, परंतु वर्ष 1978 में इस परियोजना को “गेहूं शोध निदेशालय” में परिवर्तित कर दिया गया इसके निर्माण के बाद गेहूं की खेती में काफी सुधार हुवे

👉👉राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान

👉 डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल की स्थापना मूल रूप से इंपीरियल इंस्टिट्यूट ऑफ एनिमल हसबेंडरी एंड डेयरिंग के रूप में बेंगलुरु में सन 1923 में हुई थी I वर्ष 1936 में उसका समुचित विस्तार कर इसे इंपीरियल डेरी संस्थान का नाम दिया गया था तथा सन 1947 में स्वतंत्रता के पश्चात राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान का मुख्यालय इसके वर्तमान स्थान करनाल में 1955 में स्थापित किया गया।

👉👉बधिर एवं वाणी विकलांग केंद्र

👉यह केंद्र गूंगे व बहरे बच्चों को शिक्षित करने में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा है I यहां पर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 22 अगस्त 2002 को हरियाणा के मुख्यमंत्री ने छात्रावास का शिलान्यास किया था I

👉👉फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री, मधुबन

👉 इसकी स्थापना तो सन 1973 में रोहतक में की गई थी लेकिन सन 1978 में ईसे करनाल मे स्थापित कर दिया गया।

👉👉राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संस्थान ब्यूरो

ईसकी स्थापना सन 1985 में की गई थी।

👉👉सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल्स

इसकि स्थापना इजराइल के सहयोग से घरौंडा में कि गई।

👉👉राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संस्थान

इसकी स्थापना सन 1984 में की गई थी।

👉👉मधुबन पुलिस प्रशिक्षण परिषद

👉राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर एक पर करनाल से 8 किलोमीटर दूर पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय स्थित है I ईसकी स्थापना सन 1973 में की गई थी। यहां पर हरियाणा पुलिस की ट्रेनिंग दी जाती है I

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👉👉👉करनाल के महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल

👉👉देवी मंदिर

👉सालवन करनाल जिले के गांव सालवन को मेलों का गांव भी माना जाता है I इस गांव में महाराजा युधिष्ठिर ने दशाश्वमेघ यज्ञ का आयोजन किया था I यह गांव कभी राजा शालिवान की राजधानी हुआ करता था

👉👉सीतामाई सीमागढ़ का मंदिर

👉यह हरियाणा का एकमात्र सीता माता का मंदिर है। 14 वर्ष वनवास के बाद भगवान राम के आदेश पर लक्ष्मण ने सीता को जिस जंगल में छोड़ा था उसका नाम “लाडबन” था I उस जंगल की पश्चिम दिशा में महर्षि वाल्मीकि आश्रम था, जहां सीता अपने वनवास के दौरान रह रही थी I एसा माना जाता है कि इसी स्थान पर सीता जमीन में समा गई थी I आज उसी स्थान पर “सीतामाई मंदिर” निर्मित किया गया है I

👉👉कर्ण झील तथा ओयसिस

👉कर्ण झील का निर्माण राजा कर्ण के द्वारा करवाया गया था यह 17 एकड़ में फैली हुई है उसका पुनः निर्माण सन 1972 में करवा गया। करनाल में पर्यटन विभाग ने शेरशाह सूरी मार्ग पर अंबाला की ओर लगभग 4 किलोमीटर दूर पश्चिमी यमुना नहर के दोनों और लगभग 60 कनाल भूमि पर “कर्ण झील” तथा “ओयसिस” नामक पर्यटक स्थल विकसित किए हैं I

👉👉कर्ण तलाब

👉 राजा दुर्योधन के परम मित्र और सूर्य के पुत्र राजा कर्ण के नाम पर यह “करण तालाब” यहां पर स्थापित किया गया था I कर्ण पार्क, कर्ण स्टेडियम व कर्ण तालाब ये तीनों करनाल में स्थित है बल्कि

कर्ण का टीला – कुरुक्षेत्र

गोकर्ण तालाब – रोहतक

👉👉सेंट जेम्स चर्च टावर

👉यह करनाल की एक पराचीन प्राचीन एतिहासिक धरोहर है I इस टावर का निर्माण 1806 ईस्वी में हुआ था I उस समय करनाल ब्रिटिश सैनिक छावनी का हिससा हुआ करता था I

👉👉माता बाला सुंदरी मंदिर बड़ा गांव

👉करनाल जिले के बड़ा गांव में माता बाला सुंदरी मंदिर स्थित है.

👉👉दरगाह कलंदर शाह

👉इसका निर्माण अलाउद्दीन खिलजी के सुपुत्र खिजान खान और शादी खान द्वारा कराया गया था I बू अली शाह कलंदर, सालार फकिरूदिन का पुत्र था और अनुमान है कि उनका जन्म सन 1190 ईसवी में हुआ था I

👉👉अदिति का मंदिर

👉यह मंदिर करनाल जिले के अमीन गांव में स्थित है I इसी स्थान पर आदिति ने सूर्य को जन्म देने के पूर्व तपस्या की थी I

👉👉निर्मल कुटिया

👉बाबा निक्का सिंह महाराज स्वंम छोटी कुटिया में रह कर कई लोगों की सेवा सहायता किया करते थे I बाबा के ब्रह्मालीन होने के बाद वर्ष 1960 में बाबा की याद में उनके अनुयायियों ने उनकी कुटिया को “निर्मल कुटिया” के नाम से नवाजा और यहां पर इस कुटिया की स्थापना कर दी गई

👉👉गांधी मेमोरियल हॉल

👉महारानी विक्टोरिया की याद में बने इस हाल का नाम स्वतंत्रता के बाद महात्मा गांधी के नाम पर रख दिया गया I

👉👉तरावड़ी

👉मध्यकाल में 1191 वह 1192 ईस्वी में मोहम्मद गोरी व पृथ्वीराज चौहान के मध्य तराइन का प्रथम व द्वितीय युद्ध ईसी तरावड़ी क्षेत्र में हुआ था I तरावड़ी में औरंगजेब के पुत्र आजम खान का जन्म हुआ था। आजम के नाम पर इस जगह का नाम आजमाबाद रखा गया था बाद में बदलते बदलते यह तरावड़ी हो गया।

👉👉छावनी जेम्स चर्च

👉 यह बहुत खूबसूरत छावनी चर्च है जिसका निर्माण सेंट जेम्स ने करवाया था। जिसकी ऊंचाई 100 फीट है। इस चर्च में धातु का क्रोस लगाया गया है।

👉👉अटल पार्क

👉करनाल शहर के सौंदर्यकरण हेतु सेक्टर 7 और 8 में लगभग 56 एकड़ क्षेत्र में निर्मित किया गया है I

👉👉वस्तती

👉 महर्षि वेदव्यास का आश्रम भी यहीं पर स्थित है I उन्होंने यही पर बैठकर महाभारत की रचना की थी I

👉👉विक्टोरिया मेमोरियल हॉल

👉आजादी के बाद इसका नाम गांधी मेमोरियल हाल कर दिया गया।

👉बस्तली में महर्षि वेदव्यास का आश्रम है व बहलोलपुर में महर्षि वेदव्यास के पिता पाराशर का आश्रम है।

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👉👉करनाल के विधानसभा क्षेत्र

👉करनाल

👉असन्ध

👉घरौंडा

👉इंद्री

👉नीलोखेड़ी

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👉👉👉करनाल के सबसे चर्चित स्थल व घटनाएं

👉👉करनाल का युद्ध

👉करनाल का युद्ध ईरानी शासक नादिरशाह और मोहम्मद शाह के बीच 24 फरवरी 1739 ईस्वी को हुआ था। जिसमें नादिरशाह की जीत हुई थी। इसके बाद नादिरशाह मयूर सिंहासन और कोहिनूर हीरे को अपने साथ ले गया था। मयूर सिंहासन को शाहजहां ने बनवाया था। मयूर सिंहासन पर बैठने वाला अंतिम मुगल शासक मोहम्मद शाह ही था।

👉👉तरावड़ी

👉मोहम्मद गोरी ने सन् 1191 में हिंदुस्तान पर पहला आक्रमण किया था I जिसका मुकाबला दिल्ली में अजमेर के शासक पृथ्वीराज चौहान ने तरावड़ी के मैदान में किया था I इसे तरावड़ी यानिकी तराइन की पहली लड़ाई के नाम से भी जाना जाता है I इस लड़ाई में मोहम्मद गौरी जख्मी होकर वापिस अफगानिस्तान भाग गया था तथा अगले वर्ष 1192 ईस्वी में मोहम्मद गोरी ने पूरी तैयारी के साथ पुनः आक्रमण किया और सेना एक बार फिर से तरावड़ी के मैदान में ही भिड़ी और इस बार मोहम्मद गौरी की विजय हुई

👉👉इंद्री

👉यहां पर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कच्ची समाधि स्थित है I यह स्थल बाबा सिमरण दास की दशकों पुरानी कच्ची समाधि है जो शुरूवाती समय से आज तक भी कच्ची ही है I
सन 1761 में मराठों पर विजय पाने के बाद अब्दाली ने निजाबत खां के पुत्र दिलेरखान द्वारा प्रदत सहायता से खुश होकर उसे पुनः कुंजपुरा का नवाब बना दिया और उसकी रियासत में 150 गावों को शामिल किया गया था I जिसमें इंद्री एक मुख्य गाव था । उसके बाद यह कस्बा नवाब गुलशेर खान के अधीन रहा और इसके पश्चात यह रहमतखा ने इसका शासन संभाला और 1803 में अंग्रेजो की अधीनता स्वीकार कर ली

👉👉घरौंडा

👉1739 तक यह क्षेत्र दिल्ली द्वारा नियुक्त करनाल के आमिल के अधीन रहा था I सन 1739 से 1783 तक सरहिंद के सूबेदार जिनखां का इस पर नियंत्रण रहा I इसके बाद सन 1789 तक जींद के राजा गजपत सिंह का इस पर अधिकार रहा था I सल्तनत काल में इस सराय का प्रबंध करनाल के फौजदार के द्वारा किया जाता था। बंदा बहादुर ने 1709 ईस्वी में फौजदार का वध करके करनाल व घरोंडा पर अपना अधिकार कर लिया। गेट ऑफ मुग़ल सराय भी घरौंडा में ही स्थित है।

👉👉असंध

👉ऐसा माना जाता है कि असंद का प्राचीन नाम असंधिवत था I बाद में इसका नाम चेंज होकर असंध पड़ गया और एक और अवधारणा यह भी है कि पहले यह असंध राजा परीक्षित की राजधानी हुआ करती थी

👉👉नीलाखेड़ी

👉इस कस्बे की स्थापना सन 1947 में विस्थापितों के पुनर्वास हेतू की गई थी I नीलाखेड़ी में राजकीय बहुतकनीकी संस्थान स्थित है, इसलिए यह काफी फेमस है I इसके अलावा यहां पर वर्ष 1990 में हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान की स्थापना की गई थी I इन परियोजनाओं में सफल गांव को आदर्श गांव घोषित किया जाता है I

👉👉कुंजपुरा

👉 इसकी स्थापना पठान सके निजाबत खान ने की थी। कुंजपूरा निजावत खान की राजधानी भी रहा था। हरियाणा का पहला सैनिक स्कूल यहीं पर स्थित है। जिसकी स्थापना सन 1961 में की गई थी। यह सैनिक स्कूल छोटी-छोटी ईटों से बना हुआ है। यह स्कूल पुरानी हवेली में संचालित है।

👉👉तराइन का प्रथम युद्ध

👉 यह युद्ध 1191 ईस्वी में पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच हुआ था। जिसमें पृथ्वीराज चौहान की जीत हुई थी।

👉👉तराइन का द्वितीय

👉यह युद्ध 1192 ई. मे पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच ही हुआ था और इस युद्ध में मोहम्मद गोरी की जीत हुई थी।

👉👉तराइन का तृतीय युद्ध

👉यह युद्ध इल्तुतमिश व ताजुद्दीन यलदौज ऐबक का दामाद के बीच 1215 ई. मे हुआ था। जिसमें इल्तुतमिश की जीत हुई थी।

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👉👉करनाल से जुड़ी कुछ अन्य जानकारियां

👉पैरिस ऑफ हरियाणा

👉बागवानी जैव प्रौद्योगिकी

👉बागवानी विज्ञान विश्वविद्यालय

👉औसिस फ़ास्ट फ़ूड

👉सेंट जेम्स चर्च

👉ककरोई सूक्ष्म जल विद्युत परियोजना

👉NCC अकेडमी

👉पोल्ट्री प्रशिक्षण केंद्र

👉पुलिस अकेमडी मधुबन

👉आलू प्रद्योगिकी केंद्र

👉महिला वन स्टॉप सेंटर

👉कर्ण स्टेडियम

👉प्रसिद्ध अमपुर छड़ियों का मेला

👉इग्नू केंद्रीय विश्वविद्यालय { 1991 }

👉कल्पना चावला जन्म स्थल { 1 जुलाई 1961 }

👉प्रसिद्ध अदिति का मंदिर

👉तरावड़ी की प्रसिद्ध लड़ाइयां

👉 1191 👉 1992 👉

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